15 से 20 कारीगर परिवार बचे:500 पन्नों की बहियों की जगह अब पूजा के लिए 32 से 64 पन्नों की सगुन बही
परकोटे के चांदपोल बाजार स्थित खजाने वालों का रास्ता और त्रिपोलिया के कागजी मोहल्ले में कभी दशहरे की अगली सुबह से दीपावली तक सूत के धागे और सरेस (गोंद) की महक तैरती थी। कारीगर लाल मखमली कपड़े पर…
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