भगवान को पाने के लिए तर्क नहीं, प्रेम चाहिए:इन्द्रेश उपाध्याय बोले- कथा सुनें नहीं, उसके भाव को जीवन में उतारें
प्रेम की पराकाष्ठा वह है, जहां हर भक्त स्वयं को गोपी और भगवान श्रीकृष्ण को अपना प्रियतम मानने लगे। रास केवल नृत्य नहीं, बल्कि भगवान और भक्त के बीच प्रेम का ऐसा संबंध है, जिसमें भगवान भी भक्त के भावों…
