बहादुरगढ़ में रोज पसीना बहा रहे दृष्टिबाधित हिमांशु नांदल:एशियन पैरा गेम्स में लगाएंगे पदक के लिए छलांग,पानी में रास्ता दिखाई नहीं देता, महसूस करते हैं
कहते हैं, अगर हौसले बुलंद हों तो अंधेरे में भी रास्ते अपने आप बन जाते हैं। रोहतक के रहने वाले दृष्टिबाधित तैराक हिमांशु नांदल ने इसे सच साबित कर दिखाया है। जन्म से दृष्टिबाधित हिमांशु ने पानी की…
