चिट्ठियों के इंतजार से मोबाइल संदेशों तक बदला दौर, डाकिये की अहमियत बरकरार
एक समय था, जब गांव की गलियों में साइकिल की घंटी सुनते ही लोगों के चेहरे खिल उठते थे। हर किसी को इंतजार रहता था कि डाकिया दूर शहर में रहने वाले बेटे, बेटी या किसी अपने की चिट्ठी लेकर आएगा। उसकी थैली…
