दर्द-ए-पीड़ित... 42 साल बाद भी कोटे के बावजूद नहीं मिली सरकारी नौकरियां, टैक्सी चलाकर और सिलाई करके परिवार पालने को मजबूर
गुरमीत लूथरा 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवार 42 साल बाद भी न्याय, मुआवजे और सरकारी सहायता की आस लगाए बैठे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि सरकारों की ओर से समय-समय पर किए गए वादों के बावजूद…
