मोह हर रूप में रावण, वैराग्य को ढाल बनाकर जियो:रामकथा के समापन पर मोरारी बोले बापू, कहा संसार में रहकर भीतर से मुक्त रहना सच्चा वैराग्य
मोह जिस भी रूप में सामने आए, वह रावण के समान है और संसार में रहते हुए भी भीतर से मुक्त रहना ही सच्चा वैराग्य है।” बुधवार को रामकथा के अंतिम दिन मोरारी बापू ने यह संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वैराग्य…
