'पूरी रात जागकर, करवट बदलते कट रही':पूर्वी चंपारण में 40 हजार परिवार बांध पर गुजार रहे जिंदगी, पीड़ितों के बीच 2 बजे रात तक भास्कर रिपोर्टर
“पांच दिन हो गए हैं। न ठीक से सो पा रहे हैं, न रहने की कोई व्यवस्था है। सबसे ज्यादा चिंता बच्चों की रहती है। डर लगा रहता है कि कहीं कीड़ा-मकौड़ा, सांप या कोई जंगली जानवर न आ जाए। इसी डर में पूरी रात…
