शैलेश लोढ़ा-बच्चों को बच्चा ही रहने दो...:उदयपुर में देर रात तक जमा कवि सम्मेलन, लोढ़ा ने छेड़ी बचपन बचाने की बात
कभी रिश्तों की हंसी पर ठहाके लगे तो कभी प्रेम की संवेदनाओं ने दिल छुआ। वीर रस की कविताओं ने देशभक्ति का जज्बा जगाया तो मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास ने श्रोताओं को गर्व से भर दिया। उदयपुर नगर निगम के…
